यमुना बाढ़ 2025 के दौरान प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए भारतीय किसान यूनियन (अन्नदाता) ने मानवीय सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। संगठन द्वारा लगातार 10 दिनों तक यमुना खादर क्षेत्र में राहत सामग्री का वितरण किया गया, जिसकी सराहना क्षेत्र की जनता, प्रशासनिक अधिकारियों एवं मीडिया बंधुओं द्वारा की गई।
“मैं ऐसे भारत का सपना देखता हूँ जहाँ सबसे कमजोर व्यक्ति भी स्वयं को मजबूत महसूस करे।”
— डॉ. भीमराव आंबेडकर.
इस राहत अभियान के अंतर्गत बाढ़ पीड़ित परिवारों को भोजन सामग्री, दूध, पीने का पानी एवं दैनिक आवश्यकता की सभी जरूरी वस्तुएँ उपलब्ध कराई गईं। राहत सामग्री इस प्रकार वितरित की गई कि प्रत्येक परिवार की मूलभूत जरूरतें पूरी हो सकें और उन्हें कठिन समय में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
भारतीय किसान यूनियन (अन्नदाता) के पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों ने दिन-रात मेहनत कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर सेवा कार्य किया। संगठन का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना ही नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में पीड़ितों के साथ खड़ा रहना भी रहा।
स्थानीय नागरिकों ने इस जनहितकारी कार्य की खुले दिल से प्रशंसा की और कहा कि भारतीय किसान यूनियन (अन्नदाता) ने बाढ़ आपदा के समय जिस संवेदनशीलता और समर्पण के साथ राहत कार्य किया, वह सराहनीय है। मीडिया बंधुओं द्वारा भी इस राहत अभियान को प्रमुखता से कवर किया गया।
भारतीय किसान यूनियन (अन्नदाता) भविष्य में भी किसान हित, जनआंदोलन एवं आपदा राहत जैसे जनकार्य पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करता रहेगा।
राहत सामग्री वितरण अभियान को सफल बनाने के लिए भारतीय किसान यूनियन (अन्नदाता) ने पहले से ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे किया और जरूरतमंद परिवारों की सूची तैयार की। इसके बाद राहत सामग्री को चरणबद्ध तरीके से वितरित किया गया, जिससे किसी भी परिवार को वंचित न रहना पड़े। संगठन की यह कार्यप्रणाली राहत कार्यों में पारदर्शिता और अनुशासन का उदाहरण रही।

इस अभियान के दौरान केवल खाद्य सामग्री ही नहीं, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की विशेष जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया। दूध, सूखा राशन, पीने का पानी, दवाइयाँ एवं अन्य आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराई गईं, जिससे प्रभावित परिवारों को दैनिक जीवन में राहत मिल सके। कई स्थानों पर स्वयंसेवकों ने लोगों को स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से संबंधित आवश्यक जानकारी भी दी।
भारतीय किसान यूनियन (अन्नदाता) के पदाधिकारियों ने बताया कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में सरकारी सहायता के साथ-साथ सामाजिक संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। संगठन का उद्देश्य यह रहा कि पीड़ित परिवारों को यह महसूस न हो कि वे अकेले हैं। इसी भावना के साथ कार्यकर्ताओं ने पूरे समर्पण से सेवा कार्य किया।

स्थानीय किसानों एवं ग्रामीणों ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन (अन्नदाता) ने केवल सहायता ही नहीं दी, बल्कि पीड़ितों का मनोबल भी बढ़ाया। संकट के समय संगठन की मौजूदगी से लोगों में विश्वास और सुरक्षा की भावना पैदा हुई। मीडिया बंधुओं द्वारा इस राहत अभियान को सकारात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया, जिससे संगठन के जनसेवा कार्यों को व्यापक पहचान मिली।
भारतीय किसान यूनियन (अन्नदाता) ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि ऐसी कोई आपदा आती है तो संगठन राहत, पुनर्वास एवं किसान हित से जुड़े हर कार्य में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा। संगठन का मानना है कि जनआंदोलन केवल मांगों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज की सेवा भी उसका अहम हिस्सा है। यह राहत अभियान भारतीय किसान यूनियन (अन्नदाता) की सामाजिक प्रतिबद्धता, संगठनात्मक क्षमता और मानवीय मूल्यों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है और यह सिद्ध करता है कि संगठन हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़ा है।



